


– वन मंत्री सुबोध उनियाल ने योजना स्थल का किया निरीक्षण, खारास्रोत से तपोवन तक बनाई जानी है टनल
ऋषिकेश,उत्तराखंड:
ऋषिकेश बाईपास परियोजना को अंतिम रूप देने की कवायद तेज हो गई है। ऋषिकेश से तपोवन तक जाम की समस्या से निपटने के लिए यह परियोजना संजीवनी साबित होगी। योजना को लेकर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने गुरुवार को अधिकारियों के संग स्थलीय निरीक्षण भी किया और टनल बनाने का काम जून माह से शुरू करने के निर्देश दिए।
वीकेंड और चारधाम यात्रा के दौरान सबसे अधिक जाम की समस्या नेपाली फार्म से लेकर तपोवन तक रहती है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने बाईपास बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। बाद में योजना में कुछ बदलाव किया गया। अब तीन पानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ है। इस परियोजना के तहत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर के लिए एलिवेटेड मार्ग, चंद्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा पुल और इसी क्षेत्र में 76 मीटर लंबाई का आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) प्रस्तावित है। इसके साथ ही श्यामपुर रेलवे क्रासिंग पर 318 करोड़ की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है। यह बाईपास भद्रकाली के पास हर्बल गार्डन से निकलेगा। इसके बाद खारास्रोत से तपोवन तक टनल बनाई जाएगी। खारास्रोत से तपोवन तक टनल बनने के बाद वाहन गुजर सकेंगे।
योजना को लेकर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने गुरुवार अधिकारियों के साथ स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जल्द योजना पर काम शुरू होना है। विभाग आपस में समन्वय बनाकर काम करें। वन मंत्री ने कहा कि नगर निगम ऋषिकेश, नगर पालिका मुनिकीरेती-ढालवाला, नगर पंचायत तपोवन और स्वर्गाश्रम में आने वाले सालों से ढाई से तीन हजार करोड़ के काम होंगे। जाम से छुटकारा दिलाना प्राथमिकता है। इस दौरान नगर पालिकाध्यक्ष मुनिकीरेती नीलम बिजल्वाण, परियोजना प्रबंधक विनय मिश्रा, लोनिवि नरेंद्रनगर के ईई प्रवीन कर्णवाल आदि मौजूद रहे।
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सीवर के लिए 15 जून से पहले बनाएं डीपीआर
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने गंगा अनुरक्षण इकाई को ढालवाला, चौदहबीघा क्षेत्र में सीवर की समस्या दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पंद्रह जून से पहले डीपीआर बनाई जाए। जून में ही इस क्षेत्र में सीवर योजना का शिलान्यास किया जाएगा। स्थानीय लोगों के साथ बैठक कर उनके सुझाव और समस्या सुनने को भी कहा। निरीक्षण के दौरान वन मंत्री ने नदी तटों पर बाढ़ से सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे मजबूत सुरक्षा पुश्तों, भूस्खलन और कटाव को रोकने के लिए किए जा रहे स्लोप प्रोटेक्शन कार्यों का भी देखा।
