


ब्यूरो, ऋषिकेश
श्री भरत मंदिर झंडा चौक में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने भगवान श्री हृषिकेश नारायण भरत जी महाराज के दर्शन किए और उसके पश्चात भक्त जनों को आशीर्वाद दिया। श्री भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज के द्वारा शंकराचार्य महाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का भव्य स्वागत किया गया।

शंकराचार्य महाराज ने कहा कि हृषिकेश ऐसा स्थान है जहां पर स्वयं भगवान नारायण विराजमान है और हर्षिकेश का अर्थ है इंद्रियों को जीतने वाला अर्थात अपनी इंद्रियों को वश में रखना। जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया, वह व्यक्ति ईश्वर को प्राप्त कर लेता है,उसे कहीं जाने की आवश्यकता नहीं है। उसे श्री भरत मंदिर में ही श्री बद्रीनाथ जी भगवान के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
शंकराचार्य महाराज ने बताया कि भारतवर्ष के सभी मंदिरों के प्रबंधकों को को श्री भरत मंदिर की प्रबंध समिति से प्रेरणा लेनी चाहिए कि मंदिरों का रखरखाव किस प्रकार किया जाता है। धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृत की शिक्षा भी श्री भरत मंदिर के द्वारा दी जाती है। स्वच्छता किस प्रकार की जाती है। शंकराचार्य महाराज ने कहा कि हमें गौ माता की रक्षा और गंगा की स्वच्छता और निर्मलता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए और निरंतर कार्य करना चाहिए। भारत वर्ष विश्व गुरु बन पाएगा,और सभी प्राणियों में सद्भावना और प्रेम का विकास हो पाएगा। शंकराचार्य जी महाराज के द्वारा सभी भक्तजनों को प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज , हर्षवर्धन शर्मा,वरुण शर्मा, महंत रवि प्रपन्नाचार्य, दीप शर्मा,जगमोहन सकलानी, अशोक अग्रवाल,भगत राम कोठारी, यमुना प्रसाद त्रिपाठी ,राजेंद्र बिष्ट, गीता कुकरेती, निधि चतुर्वेदी उपस्थित थे।
