


– अपने अनुशासित जीवन, ईमानदार छवि और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए पूरे देश में पहचाने जाते थे
देहरादून, उत्तराखंड:
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूरी का निधन हो गया है। उन्होंने देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में 11:15 बजे अंतिम सांस ली, जहां वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। अस्पताल प्रबंधन ने उनके निधन की पुष्टि की है।
90 वर्षीय भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रह चुके थे और अपने अनुशासित जीवन, ईमानदार छवि और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए पूरे देश में पहचाने जाते थे। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो बार प्रदेश की कमान संभाली और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं विकास कार्यों को आगे बढ़ाया।
उनके निधन की खबर से पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
वे उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी के पिता भी थे। विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से भी शोक संदेश जारी किया गया है। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
भुवन चंद्र खंडूरी का राजनीतिक सफर: सेना से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक का सफर
भुवन चंद्र खंडूरी भारतीय राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र के एक अत्यंत सम्मानित नेता रहे हैं। वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचे और सेवा निवृत्ति के बाद सक्रिय राजनीति में आए। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो बार कार्यभार संभाला—पहली बार 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक। इसके अलावा वे 2009 से 2011 तक केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री भी रहे। वे पौड़ी गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी चुने गए। खंडूरी अपनी ईमानदार छवि, सादगीपूर्ण जीवनशैली और मजबूत प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते थे। वे वर्तमान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूरी के पिता हैं और उन्हें उत्तराखंड की राजनीति में एक अनुशासित और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में हमेशा याद किया।
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जताया शोक
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।
श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
