


मानव एवं वन्यजीवों के बीच संतुलन जरुरी
– नरेन्द्रनगर वन प्रभाग में वनाग्नि प्रबन्धन एवं मानव वन्यजीव संघर्ष रोकथाम हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
ऋषिकेश,उत्तराखण्ड:
वन विभाग द्वारा आज मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं वनाग्नि प्रबन्धन विषय पर वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय विस्तृत कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य वन क्षेत्रों के आसपास बढ़ रही मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के प्रभावी प्रबंधन, जनसुरक्षा सुनिश्चित करने तथा वन कर्मियों की क्षमता संवर्धन करना था। कार्यक्रम में विभिन्न वन प्रभागों से आए रेंज अधिकारियों, वन दरोगाओं, वन रक्षकों, फायर वॉचरों एवं अन्य फील्ड स्टाफ ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यशाला में उपस्थित उप प्रभागीय वनाधिकारी, किशोर नौटियाल ने मानव एवं वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा भी विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जंगलों के समीप मानव गतिविधियों में वृद्धि, वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, प्राकृतिक आवासों में कमी तथा खाद्य एवं जल स्रोतों के बदलाव के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में वन विभाग के फील्ड स्टाफ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
कार्यशाला के दौरान तितली ट्रस्ट के विशेषज्ञ राजेश भट्ट द्वारा प्रतिभागियों को मानव-वन्यजीव संघर्ष की विभिन्न परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण सत्रों में वन्यजीवों के व्यवहार की पहचान, संघर्ष की संभावित परिस्थितियों का पूर्व आंकलन, भीड़ नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया, रेस्क्यू एवं रिलीफ ऑपरेशन तथा घायल वन्यजीवों के सुरक्षित प्रबंधन के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई।
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में स्थानीय जनता के साथ समन्वय स्थापित करना, अफवाहों को रोकना तथा समय पर सही सूचना उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला में आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों, ट्रैंकुलाइजिंग प्रक्रिया, सुरक्षा किट, संचार प्रणाली एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र के प्रभावी उपयोग का प्रदर्शन भी किया गया।
इसके अतिरिक्त वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, वन अधिनियम एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष से संबंधित अन्य कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई, जिससे फील्ड स्टाफ अपने दायित्वों का निर्वहन विधिसम्मत एवं प्रभावी ढंग से कर सके। अधिकारियों द्वारा यह भी बताया गया कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों का संरक्षण, जल स्रोतों का विकास, वन क्षेत्र में पौधारोपण तथा जनजागरूकता अभियान मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वास्तविक घटनाओं एवं केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों एवं उनके समाधान के बारे में अवगत कराया गया। साथ ही विभागीय अधिकारियों ने वन कर्मियों को कठिन परिस्थितियों में संयम, धैर्य एवं सतर्कता के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
इस कार्याशाला में उपस्थित वन क्षेत्राधिकारी विवेक जोशी ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशालाएं नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी, ताकि फील्ड स्टाफ की कार्यक्षमता, आपदा प्रबंधन क्षमता एवं त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके। विभाग ने मानव एवं वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व की भावना को बढ़ावा देने तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति आमजन को जागरूक करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
