


– एक साथ हुए किडनी व लीवर प्रत्यारोपण
– रातभर तत्परता से जीवन बचाने में जुटे रहे एम्स के चिकित्सक और टीम
ऋषिकेश, उत्तराखंड
एम्स, ऋषिकेश में बीते माह एक 23 वर्षीय युवती सड़क दुर्घटना में गंभीररूप से घायल युवती को भर्ती कराया गया था, जहां ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा था। बीते दिवस इलाज में जुटे डॉक्टरों की टीम ने युवती को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद लंबे अरसे से किडनी की बीमारी से जूझ रहे दो लोगों को युवती की दोनों किडनी और एक अन्य लीवर की बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति को एम्स, ऋषिकेश में पहली बार लीवर ट्रांसप्लांट कर नया जीवन दिया गया। खासबात यह रही कि यह दोनों जटिलतम शल्य चिकित्सा प्क्रियाएं एक साथ चली और पूरी तरह से सफल रही। जबकि एक व्यक्ति को अंग प्रत्यारोपण दिल्ली एम्स में किया गया।
निदेशक एम्स प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह एवं संस्थान प्रबंधन ने संस्थागत स्तर पर अपनी तरह की इस पहली सफल उपलब्धि के लिए चिकित्सकीय टीम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है।
परिजनों की सहमति प्राप्त होने के बाद एम्स ऋषिकेश में पहली मर्तबा सफलतापूर्वक पहला लीवर ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया गया।
बताया गया है कि नेशनल आर्गेन एंड टिसु ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो), की सहायता से आर्गेन डोनेशन के लिए जरूरतमंद मरीजों का पता लगाया गया और इसके बाद नोटो के तहत अंग दान के लिए आवंटित किए गए।
गौरतलब है कि संस्थान में बीते कुछ वर्षों से लीवर ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग संचालित की जा रही है। जिसके अंतर्गत बीते बृहस्पतिवार की रात निदेशक एम्स के निर्देशन में संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की तर्ज पर एम्स ऋषिकेश में लीवर प्रत्यारोपण पूरी तरह से सफल रहा।
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टीम में यह विशेषज्ञ रहे शामिल
अंग प्रत्यारोपण को सफल बनाने वाली टीम में इन विशेषज्ञों ने अपना योगदान दिया। जिसके अंतर्गत अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रांजल मोदी के मार्गदर्शन एवं गाइडेंस में एम्स अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. बी. सत्यश्री, संस्थान के डॉ. कर्मवीर सिंह, डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. वाईएस पयाल, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. विकास पवार, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. कल्याणी, डॉ. शैरोन कंडारी, डॉ. भारती, डॉ. भारत भूषण भारद्वाज, डॉ. सारंग भारती आदि विशेषज्ञ चिकित्सक अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने में शामिल रहे।
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दिल्ली एम्स भेजे गए एक किडनी और पेनक्रियाज
ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से डोनेट की गई एक किडनी और पेनक्रियाज को किसी जरूरतमंद पेशेंट को प्रत्यारोपित करने के लिए बीती बृहस्पतिवार की रात में ही दिल्ली, एम्स को भेजा गया है। बताया गया है कि एम्स दिल्ली को भेजे गए अंगों का भी प्रत्यारोपण पूरी तरह से सफल रहा।
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सफलता का यह पहला पायदान है, एम्स संस्थान इस दिशा में आगे तीब्रगति से सततरूप से कार्य करते हुए उत्तराखंड के लोगों की चिकित्सा सेवा का कार्य करेगा। इसके साथ ही उन्हें अंगदान को लेकर जागरूक भी किया जाएगा।
प्रोफेसर मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश
