


– अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 से विश्व शान्ति का आह्वान: स्वामी चिदानंद
– 80 से अधिक देशों के 1200 से अधिक योग जिज्ञासुओं और योगाचार्यों होंगे शामिल
ऋषिकेश, उत्तराखंड:
परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आयोजित इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल में इस वर्ष परमार्थ निकेेेेेेेतन परिवार लगभग 80 देशों से आए करीब 1200 योग साधकों का स्वागत करने के लिए पूर्णतः तैयार है। इस महोत्सव का विधिवत उद्घाटन सोमवार को को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी द्वारा किया जाएगा। पूरे सप्ताह भर इस आयोजन में माननीय मंत्रीगण, विभिन्न राष्ट्रों के राष्ट्रध्यक्ष, राजनयिक एवं विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता रहेगी।
इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल को भारत सहित विश्व स्तर पर टाइम मैग्जीन, न्यूयार्क टाइम्स, सीएनएन सहित विश्व की अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं और मीडिया मंचों में व्यापक रूप से स्थान प्राप्त हुआ है। यह महोत्सव भारत के महान आध्यात्मिक गुरुओं और योग आचार्यों को एक मंच पर लाने का उत्कृष्ट मार्ग है।
इस वर्ष के महोत्सव की प्रमुख विशेषताओं में शिवा रिया, आनंद मेहरोत्रा, किया मिलर, रूना रिजवी शिवमणि, स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट, साध्वी आभा सरस्वती, गंगा नंदिनी, आध्या, डॉ. गणेश राव, डॉ. एच.आर. नागेन्द्र सहित अनेक प्रतिष्ठित वक्ताओं के साथ दिव्य आध्यात्मिक सत्र शामिल होंगे।
संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ड्रम्स शिवमणि और रूना रिजवी, राधिका दास एंड फ्रेंड्स, सुधांशु शर्मा, साइमन ग्लोडे, पद्मश्री कैलाश खेर एवं कैलासा बैंड, कृष्णप्रिया, गुरनिमित सिंह तथा परमार्थ के ऋषिकुमारों द्वारा विशेष योग प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के मार्गदर्शन से आयोजित 38 वें अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में प्रतिभागियों को 150 से अधिक योग कक्षाएअ, कार्यशालाएं, प्रवचन और संवाद सत्रों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इनमें कुंडलिनी योग, हठ योग, योग निद्रा, प्राणायाम, ध्यान, आयुर्वेद, ध्वनि चिकित्सा, भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत जैसे विविध विषय शामिल हैं।
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मात्र भू-भाग नहीं बल्कि योग की धरती है उत्तराखंड
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि आज जब विश्व विभाजन, संघर्ष और असंतोष की पीड़ा से जूझ रहा है, ऐसे समय में हम योग के माध्यम से सम्पूर्ण वैश्विक परिवार को मां गंगा के पावन तट और हिमालय की दिव्य गोद में आमंत्रित कर रहे हैं, ताकि यहां से वे शांति, सद्भाव और एकात्मता का दिव्य संदेश लेकर जाएं। उत्तराखण्ड केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि योग की भूमि, तप की भूमि, त्याग की भूमि और गहन ध्यान की पवित्र साधना-स्थली है। यहां आयोजन जाग्रत विश्व के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
