


– मंगलवार से होंगे विभिन्न कार्यक्रम, आम लोगों को किडनी रोगों के प्रति जागरूक करना है उद्देश्य
ऋषिकेश, उत्तराखंड
विश्व किडनी डे पर इस बार एम्स जन जागरूकता की लंबी श्रृंखला शुरू करने जा रहा है। श्रृंखला के पहले दिन कल मंगलवार को संस्थान में पब्लिक अवरनेस प्रोग्राम आयोजित होगा। कार्यक्रम में किडनी संबन्धित रोगों और उनसे बचाव पर विस्तृत जानकारी दी जायेगी।
विश्व में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार भारत में आबादी के 17 प्रतिशत से अधिक लोगों में क्रोनिक किडनी डिसीज के लक्षण दिखायी देते हैं। इनमें से 33 प्रतिशत मामले क्रोनिक किडनी डिसीज के और 30-40 प्रतिशत मामले डायबिटिक किडनी डिसीज के हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आम लोगों को किडनी रोगों की जानकारी देने और उनमें किडनी रोगों के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से एम्स ऋषिकेश में कल मंगलवार से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं। इस बारे में जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत ने बताया कि मंगलवार को आयोजित किए जा रहे किडनी रोग जनजागरूकता कार्यक्रम में किडनी रोग के लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में लाभकारी जानकारी दी जायेगी। साथ ही क्रोनिक किडनी डिसीज के बारे में भी बताया जायेगा।
प्रो. रविकांत ने बताया इस कार्यक्रम में किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके रोगी भी अपने अनुभव साझा करेंगे। अगले दिन बुद्धवार को संस्थान में किडनी रोग विषय पर ही सीएमई आयोजित की गयी है। जबकि बृहस्पतिवार को अस्पताल में नेफ्रो ओपीडी एरिया में जन जागरूकता का विशेष कार्यक्रम होगा।
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डायबिटिक किडनी डिसीज को समझना जरूरी
ऋषिकेश। डायबिटिक किडनी डिसीज किडनी फेलियर के मुख्य कारणों में से एक है। यह एक गंभीर कॉम्प्लिकेशन है जिसमें लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर किडनी के नाजुक फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और इस कारण किडनी पूरी तरह फेल हो सकती है। एम्स में नेफ्रो व जनरल मेडिसिन विभाग के हेड प्रो. रविकांत ने बताया कि शुरूआती चरण में इस बीमारी के कोई विशेष लक्षण नहीं होते हैं लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ने लगती है लक्षण पहिचान मे आने लगते हैं। उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख लक्षणों में पैरों, टखनों या हाथों में सूजन, झागदार पेशाब आना या पेशाब कम आना, सांस लेने में दिक्कत और अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर शामिल हैं। प्रो. रविकांत ने बताया कि अनियंत्रित ब्लड शुगर और हाई ब्लड प्रैशर सहित धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और किडनी की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री इसके कारणों में शामिल हैं। अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो यह परमानेंट डैमेज (एंड-स्टेज किडनी डिसीज) का कारण बन सकता है जिसके लिए डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। बचाव के बारे में उन्होंने बताया कि ब्लड शुगर मैनेज करके रखना, ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना और नियमित स्तर पर ब्लड शुगर की जांच करवाते रहना चाहिए। बताया कि आइबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन जैसी पेन रिलीवर का ज्यादा इस्तेमाल कतई नहीं करना चाहिए।
