



ऋषिकेश, उत्तराखंड:
देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक राजधानी ऋषिकेश के ढालवाला क्षेत्र में रविवार को सनातन संस्कृति समागम का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आचार्य अंकित पंत के संयोजन में तथा काल भैरव पीठाधीश्वर महाराज के सानिध्य में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
समागम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे संत-महात्माओं, आचार्यगण, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता की और वर्तमान समाज की गंभीर चुनौतियों पर सनातन दृष्टिकोण से अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से ज्योतिष भागवत आचार्य श्याम बिहारी चतुर्वेदी एवं कथा प्रवक्ता विष्णु कांत भारद्वाज, नगर पालिका अध्यक्ष मुनिकीरेती नीलम बिजल्वान, समाजसेवी सुखदेव बडोनी जी, काल भैरव सेवा दल ऋषिकेश से जुड़े युद्धवीर कोहली, केशव स्वरूप महाराज सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
समागम के दौरान वक्ताओं ने विलुप्त होती भारतीय संस्कृति को बचाने, नशा मुक्त समाज की स्थापना, बच्चों में संस्कार, भारतीय परिधान एवं जीवनशैली को अपनाने, वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार, मानसिक तनाव व आत्महत्या जैसी बढ़ती समस्याओं, सामाजिक विद्वेष एवं गृह क्लेश के कारणों तथा उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की।
इसके साथ ही कन्याओं की सुरक्षा, प्राचीन एवं आधुनिक सभ्यता के अंतर, पर्वतों व नदियों के संरक्षण, संस्कार और विज्ञान के समन्वय तथा सनातन धर्म की बात और आचरण के बीच बढ़ते अंतर जैसे विषयों पर भी गंभीर मंथन किया गया।
कार्यक्रम में ठाकुर गोविंद राघव, ठाकुर विजयपाल सिंह, आचार्य लोकेश शास्त्री, शास्त्री रुपेश तिवारी, छाया गौतम, मंजू नेगी, सुनील पंवार, कुलदीप गढ़िया तथा कान्हा पंत ने भी अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नशा समाज के लिए गंभीर संकट बन चुका है और इससे युवाओं को बचाने के लिए परिवार, समाज एवं संतों की सामूहिक भूमिका अत्यंत आवश्यक है। सनातन संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि संतुलित, वैज्ञानिक एवं नैतिक जीवन पद्धति है।
समागम का समापन नशा-मुक्त, संस्कारित, समरस एवं पर्यावरण-संवेदनशील समाज के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
