


– कई देशों से आए विदेशी साधकों ने भारतीय श्रद्धालुओं के साथ खेली होली
ऋषिकेश, उत्तराखंड:
परमार्थ निकेतन, मां गंगा के पावन तट पर परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में आध्यात्मिक और उत्सवमयी ऊर्जा के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर रंगों का भव्य उत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।

देश-विदेश से आए श्रद्धालु, योग जिज्ञासु और साधक इस पावन अवसर पर एकत्र होकर आपसी भेदभाव, जाति, भाषा और सीमाओं से ऊपर उठकर एक वैश्विक परिवार के रूप में प्रेम के रंगों में सराबोर हो गये।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने रंगोत्सव की शुभकामनाएं देते हुये कहा कि सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता के रंगों की मधुर बौछार हो। जीवन का प्रत्येक क्षण आनंद, शांति और सकारात्मकता से परिपूर्ण रहे। घर-परिवार में प्रेम, स्वास्थ्य और सौहार्द सदा बना रहे। हर चुनौती अवसर में बदले, हर प्रयास सफलता में खिले और हर दिन नई आशा व ऊर्जा लेकर आए तथा जीवन निरंतर प्रगति, प्रकाश और प्रसन्नता के सुंदर रंगों से आलोकित होता रहे।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा भारतीय संस्कृति, समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है, होली का उत्साह केवल एक दिन तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे जीवन का स्थायी भाव बने। हम प्रतिदिन अपने व्यवहार में प्रेम, सहयोग, क्षमा और करुणा के रंग भरें। अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए सकारात्मक सोच और सेवा की भावना को अपनाएं। यही वास्तविक होली है और यही उत्सव है।
