


ऋषिकेश, उत्तराखंड:
देवभूमि उत्तराखण्ड, हिमालय की पावन गोद में स्थित परमार्थ निकेतन इन दिनों योग, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत रंगों से सराबोर है। विश्व विख्यात अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के आरम्भ से पूर्व ही यहां का वातावरण योगमय हो उठा है। दुनिया के विभिन्न देशों से आये योग साधक और आध्यात्मिक जिज्ञासु माँ गंगा के पावन तट पर योग, ध्यान, प्राणायाम, सत्संग और दिव्य गंगा आरती में भाग लेकर एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
प्रातःकाल उगते हुए सूर्य की स्वर्णिम किरणों के बीच परमार्थ गंगा तट पर साधक जब योग और ध्यान का अभ्यास करते हैं तो ऐसा प्रतीत होता है मानो सम्पूर्ण प्रकृति ही योगमय हो गयी हो। गंगा जी की कलकल धारा, हिमालय की शांत छाया इस साधना को और भी दिव्यता प्रदान करता है।
विश्व के विभिन्न देशों, अमेरिका, यूरोप, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, इटली सहित एशिया के अनेक देशों से आये योग साधक यहां भारतीय योग परम्परा की गहराई और उसकी आध्यात्मिकता को अनुभव करते हैं। अनेक साधकों का अनुभव है कि ऋषिकेश में गंगा तट पर योग करना उनके लिए जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव है, जहाँ वे केवल शरीर का अभ्यास नहीं बल्कि आत्मा की शांति और संतुलन को भी महसूस करते हैं।
एकता का संदेश देने के लिए तैयार है। गंगा तट पर योग के रंगों में रंगी यह आध्यात्मिक भूमि सम्पूर्ण विश्व को आमंत्रित कर रही है।

परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सामंजस्यपूर्ण बनाने का मार्ग है। उन्होंने कहा, योग हमें अपने भीतर झांकने की प्रेरणा देता है। जब हम योग के माध्यम से स्वयं से जुड़ते हैं, तब हम सम्पूर्ण सृष्टि से भी जुड़ जाते हैं।
