


ज्ञान के साथ ही गुणों का भी सागर हैं हनुमान जी: ब्रह्म स्वरूप ब्रह्मचारी
ऋषिकेश, उत्तराखंड:
ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्र में गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों में सुंदरकांड, अखंड रामायण पाठ सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए गए।

श्री जयराम आश्रम अन्न क्षेत्र ऋषिकेश में हनुमान जन्मोत्सव पर ऋषिकुमारों ने अखंड रामायण पाठ किया। सामूहिक रूप से बजरंग बली की पूजा-अर्चना की गई। राधा माधव संकीर्तन मंडल की ओर से भजनों की प्रस्तुति दी गई।
आश्रम परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि प्रभु हनुमान के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता उनका शक्तिमान होना ही नहीं, बल्कि उनका ज्ञान के साथ ही गुणों का भी सागर होना है। हनुमान शक्तिशाली, अपराजेय व संकटमोचन है। लेकिन, उन्होंने कभी अपनी शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया।

इस मौके पर संगठन मंडल की ओर से सुंदरकांड, हनुमान चालीसा के साथ भजनों के माध्यम से मारुति नंदन की महिमा का गुणगान किया।
इस अवसर पर पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक प्रोफेसर एनपी माहेश्वरी डा. एमसी त्रिवेदी, पूर्व पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा, बचन पोखरियाल, अशोक अग्रवाल गुड्डू, विजय सारस्वत, महंत विनय सारस्वत, जगमोहन सकलानी, अशोक रस्तोगी, चंद्रशेखर शर्मा, जयेंद्र रमोला, गंगाराम आडवाणी, पंडित मायाराम शास्त्री, प्रदीप शर्मा, मधुसूदन शर्मा, संजय शास्त्री, गंगा सभा कार्यकारी अध्यक्ष राहुल शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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कोतवाली में हुआ हनुमंत का पूजन
कोतवाली ऋषिकेश में इस वर्ष भी हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। यहां स्थित हनुमान मंदिर में भगवान को भोग लगाया गया। इस अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। कोतवाली परिसर में इस मौके पर सामूहिक रूप से प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ। पुलिस उपाधीक्षक नीरज सेमवाल, कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट आदि मौजूद रहे।
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मनोकामना सिद्ध श्री हनुमत पीठ में मनाया गया जन्मोत्सव
माया कुंड स्थित मनोकामना सिद्ध श्री हनुमत पीठ मंदिर में हनुमान जयंती महोत्सव धूमधाम और श्रद्धापूर्वक मनाया गया इस मौके पर भगवान का भोग लगाया गया श्रद्धालुओं के द्वारा भजन संकीर्तन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। बुधवार को मंदिर में अखंड श्री रामचरितमानस पाठ का शुभारंभ हुआ हनुमान जयंती के मौके पर श्री रामायण पाठ का समापन करने के पश्चात हवन एवं यज्ञ की पूर्णाहुति दी गई।
इस अवसर पर महंत सच्चिदानंद शास्त्री के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में महामण्डलेश्वर डा. स्वामी रामेश्वरदास, सुदामा सिंघल, पार्षद राजेंद्र प्रेम सिंह बिष्ट, गोविंद अग्रवाल, कविता शाह, नवीन अग्रवाल मौजूद रहे।
