




– प्रभावित क्षेत्रों का लिया जायजा; दिए सख्त निर्देश
देहरादून, उत्तराखंड:
उत्तराखंड में मौसम विभाग के ‘रेड अलर्ट’ के बीच देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
आपदा की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
गुरूवार को मूसलाधार बारिश के बीच डीएम ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए ग्राउंड जीरो का रुख किया।
उन्होंने सहस्रधारा, कार्लीगाढ़ और अति-संवेदनशील सपेरा बस्ती का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्थाओं को परखा।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रभावित लोगों से बात कर उन्हें सुरक्षा का पूरा भरोसा दिलाया।
मलबे के कारण चार अलग-अलग स्थानों पर पूरी तरह ठप पड़े सहस्रधारा-सरोना मोटर मार्ग पर डीएम सबसे पहले पहुंचे।
अधिकारियों ने बताया कि बजट की कमी और स्थाई ट्रीटमेंट न होने से यह मार्ग हल्की बारिश में भी बार-बार बंद हो जाता है।
इस पर जिलाधिकारी ने दोनों तरफ से जेसीबी मशीनें लगाकर मलबे को तुरंत साफ करने के आदेश जारी किए।
उन्होंने जनता को राहत देने के लिए शासन स्तर पर वार्ता कर मार्ग के स्थाई ट्रीटमेंट का आश्वासन भी दिया।
कार्लीगाढ़ में पिछली आपदा के मलबे का निस्तारण और नदी चैनलाइजेशन का काम पूरा पाया गया।
हालांकि, नदी के दूसरी तरफ रह रहे परिवारों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी बेहद गंभीर दिखाई दिए।
डीएम ने तहसील प्रशासन को निर्देश दिए कि नदी पार रहने वाले परिवारों के पास राशन-पानी की पुख्ता व्यवस्था हो।
आपात स्थिति से निपटने के लिए इन सभी परिवारों के फोन नंबर जिला कंट्रोल रूम से जोड़ने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान खुद अति-संवेदनशील सपेरा बस्ती के निवासियों के बीच पहुंचे।
उन्होंने वहां बह रहे नाले के ट्रीटमेंट और क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत के लिए तुरंत एस्टीमेट तैयार करने को कहा।
सपेरा बस्ती के स्थानीय लोगों से सीधा संवाद कर उन्होंने सुरक्षात्मक उपायों पर उनके सुझाव भी मांगे।
नगर निगम को निर्देश दिए गए कि असुरक्षित मकानों में रह रहे लोगों को फौरन सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाए।
डीएम ने चेतावनी दी कि बारिश के दौरान अलर्ट सिस्टम मजबूत रहना चाहिए और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान पीएमजीएसवाई, सिंचाई विभाग, नगर निगम और आपदा प्रबंधन के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, बृहस्पतिवार को जिले में औसत 25.75 मिमी. वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
जिले की स्थिति पर नजर डालें तो इस समय यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान पर पहुंच चुका है।
राहत की बात यह है कि गंगा और टोंस नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान के नीचे बना हुआ है।
भूस्खलन के कारण हरिपुर-इच्छाडी-कुवानु-मीनास राज्य मार्ग तीन अलग-अलग स्थानों पर अवरुद्ध हो गया है।
प्रशासन ने दावा किया है कि इस महत्वपूर्ण राज्य मार्ग को आज शाम तक पूरी तरह सुचारू कर लिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त भारी बारिश के चलते जिले के 14 ग्रामीण मार्ग भी मलबे के कारण बंद हो गए हैं।
सभी अवरुद्ध ग्रामीण मार्गों को खोलने और यातायात बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है।
जिलाधिकारी के इस औचक दौरे और कड़े रुख से आपदा प्रबंधन से जुड़े महकमों में हड़कंप मचा रहा।
ग्राउंड जीरो पर डीएम की इस सक्रियता से स्थानीय जनता ने भी राहत की सांस ली है।
प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते मानसून की इस आपदा से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
