



देहरादून, उत्तराखंड:
साहित्य और संस्कृति की धरती उत्तराखंड के प्रतिष्ठित कथाकारों की तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों आज लोकार्पण संपन्न हुआ। इस अवसर पर सुरेश उनियाल की ‘मेरी फंतासियाँ’, महेश दर्पण द्वारा संपादित ‘उत्तराखंड के कथाशिल्पी गंगा प्रसाद विमल’ व जितेन ठाकुर के कहानी संग्रह ‘एक टुकड़ा जिंदगी’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रबुद्ध साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति से चर्चा को समृद्ध बनाया।
कहानीकार नवीन कुमार नैथानी ने सुरेश उनियाल के लेखन की सराहना करते हुए कहा कि ‘मेरी फंतासियाँ’ में कल्पना का एक अबाध आकाश है। उन्होंने रेखांकित किया कि
सुरेश उनियाल पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से लेखन में सक्रिय हैं। वे हिंदी के उन विरल लेखकों में से हैं जिन्होंने अपने लंबे साहित्यिक सफर के केंद्र में केवल ‘कहानी’ विधा को ही रखा। इस संग्रह की विशिष्टता इसमें संकलित फैंटेसी और विज्ञान-कथाएं हैं, जो उन्हें समकालीन लेखकों से अलग खड़ा करती हैं।
प्रो (डॉ) संजीब सिंह नेगी ने कहानीकार डॉ. गंगा प्रसाद विमल के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि
डॉ. विमल ने ‘अकहानी’ आंदोलन के प्रणेता के रूप में पारंपरिक कहानी के ढांचे को तोड़कर एक नया कथा- मुहावरा गढ़ा।
उनकी रचनाएं आम आदमी की टूटन, विसंगति और अलगाव के यथार्थ को गहराई से व्यक्त करती हैं।
आज के उत्तर-आधुनिक और ‘पोस्ट-ट्रुथ’ समय में डॉ. विमल की कहानियों की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है।
डायट के पूर्व प्राचार्य राकेश जुगरान ने जितेन ठाकुर के नए संग्रह ‘एक टुकड़ा जिंदगी’ पर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि
जितेन ठाकुर की कहानियों के पात्र हमारे समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से विपन्न वर्ग से आते हैं।
ठाकुर के पास समय और समाज की धड़कन को पकड़ने की अद्भुत समझ है।
कहानियों में घटनाओं के बिंब बहुत ही सहज और सरल तरीके से बुने गए हैं, जो लेखक की अतिशय संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।
इस गरिमामयी आयोजन ने उत्तराखंड के साहित्यिक परिदृश्य को नई ऊर्जा प्रदान की है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने लेखकों को उनकी कृतियों की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कहानीकार जितेंद्र शर्मा ने कहा कि ये अवसर देहरादून और हम सभी साथियों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है। इसलिए भी की हम आज यहाँ तीन महत्वपूर्ण कहानीकारों की पुस्तकों के लोकार्पण के साक्षी बन रहे हैं। और इन तीनों ही कहानीकारों का उत्तराखंड व देहरादून से गहरा नाता रहा है।
ये कृतियाँ न केवल साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि अपने-अपने ढंग से जीवन, समाज और रचना-प्रक्रिया के गहन अनुभवों व कथन को अभिव्यक्त करती हैं।
मेरी फंतासियाँ कल्पना के उस अबाध आकाश को छूती है, जहाँ यथार्थ और स्वप्न के बीच रचनात्मक संवाद दिखाई देता है। मुझे आशा है कि ये तीनों पुस्तकें व्यापक पाठक वर्ग अपनी पहुँच बनाएंगी व साहित्यिक विमर्श को और समृद्ध करेंगी। लोकार्पण समारोह का संचालन साहित्यकार मुकेश नौटियाल ने किया।
इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार मदन शर्मा, राजेश सकलानी,धनेश दत्त पांडेय,अर्चना पैन्यूली,अनीता सभरवाल, सुधा थपलियाल,डी एन भटकोटी, शूरवीर रावत, कांता घिल्डियाल, सी एन मिश्रा,कुसुम भट्ट, प्रतिमान उनियाल, राकेश बलूनी, चंदन सिंह नेगी, सत्यानंद बडोनी, आंनद दीवान,एस पी नौटियाल, पिंकी बिष्ट आदि उपस्थित रहे।
